📅 | ⏰

Header Ads

केंद्रीय बजट 2026-27: संपूर्ण विश्लेषण – विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर को 'बूस्ट', लेकिन शेयर बाजार पर सख्ती

केंद्रीय बजट 2026-27: संपूर्ण विश्लेषण – विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर को 'बूस्ट', लेकिन शेयर बाजार पर सख्ती

वित्त मंत्री ने संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। इस बजट की दिशा स्पष्ट रूप से 'विकसित भारतकी ओर है, जिसमें घरेलू विनिर्माण (Domestic Manufacturing) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर भारी निवेश किया गया है। हालांकि, सरकार ने वित्तीय बाजारों में सट्टेबाजी (Speculation) को कम करने और कर प्रणाली में समानता लाने के लिए शेयर बाजार के निवेशकों पर कर का बोझ बढ़ाया है।

Union Budget 2026-27, India Budget 2026-27, Central Budget 2026 analysis, Union Budget 2026 highlights, Budget 2026 key points, manufacturing sector boost, manufacturing growth India, infrastructure development, infrastructure investment, capital expenditure increase, capex boost, Make in India, Atmanirbhar Bharat, industrial growth, MSME support, job creation, economic growth India, GDP growth forecast, stock market tightening, stock market regulations, capital gains tax changes, share market impact, investors impact, equity market rules, trading tax changes, Finance Bill 2026, tax reforms India, budget impact on stock market, finance minister budget speech viralhinidpost, viralpost, viral post, hini, india, 2026


1. शेयर बाजार और कराधान (Taxation): बड़े बदलाव

बजट का सबसे चर्चा वाला हिस्सा कैपिटल मार्केट टैक्स में बदलाव है। सरकार ने 'आर्बिट्राज' (Arbitrage) को खत्म करने की कोशिश की है।

शेयर बायबैक (Share Buybacks) पर नया नियम:

पहले क्या था: पहले कंपनियां बायबैक पर खुद टैक्स देती थीं और शेयरधारकों के लिए यह टैक्स-फ्री होता था।

अब क्या होगा: अब बायबैक से होने वाली आय को 'पूंजीगत लाभ' (Capital Gains) माना जाएगा। शेयरधारक को अपनी श्रेणी के अनुसार टैक्स देना होगा।

1. कॉरपोरेट प्रमोटर: प्रभावी टैक्स दर 22% होगी।
2. नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर: प्रभावी टैक्स दर 30% होगी।
3. खुदरा निवेशक (Minority Shareholders): इन्हें होल्डिंग अवधि (Long term/Short term) के आधार पर मौजूदा कैपिटल गेन्स टैक्स नियमों के अनुसार टैक्स देना होगा।

STT (Securities Transaction Tax) में भारी बढ़ोतरी:

डेरिवेटिव्स (F&O) मार्केट में रिटेल भागीदारी और सट्टेबाजी को कम करने के लिए लागत बढ़ाई गई है:

1. Futures: STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
2. Options Premium: STT 0.1% से बढ़ाकर 0.15% किया गया है।
3. Options Exercise: एक्सरसाइज पर STT 0.125% तय किया गया है।

वही बात करे पिछले वर्ष की तुलना मे तो Futures ट्रैडिंग मे 150% की बढ़ोतरी तो वही Option में 50 % बढ़ोतरी की गई है ।

2024 से अब तक बढ़ोतरी Future में 300% और Option में 140% हो गई है ।

प्रभाव: इससे हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेड्स महंगे हो जाएंगे।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में बदलाव:
सरकार ने SGB के टैक्स नियमों को तर्कसंगत बनाया है। अब कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिलेगी जो:
1. बॉन्ड सीधे आरबीआई (RBI) के इश्यू के दौरान खरीदेंगे।
2. और, उसे मैच्योरिटी (8 साल) तक होल्ड करेंगे।
3. सेकेंडरी मार्केट: अगर आप स्टॉक एक्सचेंज (Secondary Market) से SGB खरीदते हैं, तो मैच्योरिटी पर होने वाला मुनाफा कर योग्य (Taxable) होगा।


2. विनिर्माण और आत्मनिर्भरता (Manufacturing & Self-Reliance)

'मेक इन इंडिया' को अगले स्तर पर ले जाने के लिए सरकार ने तीन बड़े सेक्टर्स पर दांव लगाया है: इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और क्रिटिकल मिनरल्स।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (बड़ा उछाल):
    • 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' का बजट लगभग दोगुना कर दिया गया है। इसे 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया गया है।
    • उद्देश्य: भारत को मोबाइल और हार्डवेयर का ग्लोबल हब बनाना और चीन पर निर्भरता कम करना।
  • 'बायोफार्मा शक्ति' (Biopharma SHAKTI):
    • सरकार ने बायोलॉजिक्स (Biologics) और बायोसिमिलर (Biosimilars) दवाओं के उत्पादन के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह योजना 5 वर्षों के लिए है। इससे जटिल बीमारियों की सस्ती दवाएं भारत में बन सकेंगी।
  • रेयर अर्थ कॉरिडोर (Critical Minerals):
    • भविष्य की तकनीक (EV बैटरी, डिफेंस) के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने हेतु ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' बनाए जाएंगे। इसमें खनन से लेकर रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग तक सब शामिल होगा।

3. बुनियादी ढांचा (Infrastructure & Capex)

अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार ने पूंजीगत व्यय (Capex) में बढ़ोतरी जारी रखी है।

  • सार्वजनिक कैपेक्स: इसे पिछले वर्ष के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • प्रभाव: सीमेंट, स्टील और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए यह बहुत सकारात्मक है और इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

4. व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business)

सरकार ने आईटी और छोटे उद्योगों की राह आसान करने के लिए नियमों में ढील दी है।

  • IT सेक्टर के लिए 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour):
    • आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर लिमिट को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
    • फायदा: इसका मतलब है कि 2,000 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली आईटी कंपनियों को ट्रांसफर प्राइसिंग के मामलों में टैक्स अधिकारियों से कम जांच और विवादों का सामना करना पड़ेगा।
  • SME ग्रोथ फंड:
    • छोटे और मध्यम उद्योगों (SME) के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित फंड प्रस्तावित किया गया है। यह फंड उन छोटे व्यवसायों को पूंजी देगा जो अपना विस्तार (Scaling up) करना चाहते हैं।
  • विदेशी विशेषज्ञों के लिए टैक्स छूट:
    • ग्लोबल टैलेंट को भारत लाने के लिए, अनिवासी विशेषज्ञों (Non-resident experts) की वैश्विक आय (Global Income) को 5 वर्षों के लिए टैक्स-फ्री कर दिया गया है। उनसे केवल भारत में कमाई गई आय पर टैक्स लिया जाएगा।

5. सीमा शुल्क (Customs Duty) में प्रमुख बदलाव

आयात-निर्यात को संतुलित करने के लिए ड्यूटी स्ट्रक्चर में बदलाव किए गए हैं:

  • आम आदमी के लिए: निजी उपयोग (Personal use) के लिए आयातित सामान पर शुल्क 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। (विदेश से सामान मंगाना सस्ता होगा)।
  • सीफूड एक्सपोर्टर्स: समुद्री भोजन के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, कुछ विशेष इनपुट्स (कच्चा माल) के शुल्क-मुक्त आयात की सीमा पिछले साल के निर्यात मूल्य के 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं (Nuclear Projects) के लिए सीमा शुल्क में छूट को 2035 तक बढ़ा दिया गया है।
  • विमानन (Aviation): भारत में विमानों की मरम्मत और निर्माण (MRO) को बढ़ावा देने के लिए विमान के कल-पुर्जों पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है।

निष्कर्ष: यह बजट किसके लिए क्या लाया?

1.     ट्रेडर्स के लिए: यह बजट सख्त है। F&O में STT बढ़ने से लागत बढ़ेगी।

2.     लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए: सकारात्मक है। इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर खर्च से शेयर बाजार में लंबी अवधि में तेजी आ सकती है।

3.     कॉरपोरेट जगत के लिए: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी कंपनियों के लिए यह बजट 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है।

4.     आम करदाता के लिए: व्यक्तिगत आयकर स्लैब में कोई सीधा बदलाव घोषित नहीं हुआ है (जैसा कि उपलब्ध जानकारी में है), लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी घटने से विदेशी सामान सस्ता होगा।


Post a Comment

0 Comments

close